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एनएसडी यानी नैनीताल स्कूल ऑफ़ ड्रामा

34 साल पहले नैनीताल में युगमंच की आहट हुई थी. अब ये आहट सांस्कृतिक स्थानिकता और अंतरराष्ट्रीयतावाद की मिलीजुली गूंज में तब्दील हो गई है. पहाड़ की जन संस्कृति को देश दुनिया से रुबरु कराने में युगमंच का थियेटर याद किया जाता है. चाहने वाले इसे नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा की तर्ज पर नैनीताल स्कूल ऑफ़ ड्रामा भी कहते हैं.
युगमंच ने देश के विभिन्न रंग मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. और टीवी, फ़िल्म और नाटकों में कई प्रतिभाएं रवाना की हैं. युगमंच की हलचल का अंदाज़ा इसी बात से लगता है कि वो एक साथ विभिन्न कलाओं में सक्रिय है. वहां थियेटर भी है, कविता भी, पोस्टर भी, फ़िल्म भी, होली भी और आंदोलन भी. रचनाधर्मिता की इतनी गूंजे अनुगूंजे एक साथ एक जगह से निकलती रही है.
पिछले 34 साल से , ये रंग यात्रा का एक ऐसा विरल अनुभव बन गया है जिसकी धाक देश के थियेटर पर्यावरण में दर्ज है. कुमांउनी होली जैसी स्थानीय परंपरा को पहाड़ की विशिष्टता के तौर पर स्थापित करने और रंगमंच में स्थानिकता और भाषाई तेवरों को जगह दिलाने में वरिष्ठ रंगकर्मी ज़हूर आलम और उनके युगमंच का बड़ा योगदान है. यही कारण है कि भारत की जिन रंगशालाओं का प्रतिभाएं तैयार करने और थियेटर का माहौल विकसित करने में नाम हैं उनमें युगमंच को भी शामिल किया जाता है. नुक्कड़ नाटकों, पुस्तक चर्चाओं, पोस्टर प्रदर्शनियों और प्रभात फेरियों के ज़रिए युगमंच उत्तराखंड आंदोलन को गति और ताज़गी और हिम्मत भी मुहैया कराता रहा था.
आज जब बाजारवादी ताकतें हर चीज को लील लेने पर आमादा हैं युगमंच अब भी जन सरोकारों का मंच है. 2009 में नैनीताल में प्रतिरोध का सिनेमा बैनर से कई अहम फ़िल्में दिखाई गई और रिस्पॉंस इतना शानदार रहा कि हर साल अक्टूबर नवंबर में ये आयोजन करने का फ़ैसला किया गया. युगमंच और जन संस्कृति मंच ने मिलकर ये आयोजन किया था. जैसा कि युगमंच के प्रमुख ज़हूर आलम बताते हैं कि फ़िल्म उत्सव के बहाने सांस्कृतिक क्रियाशीलता का एक और प्लेटफॉ़र्म तैयार हो रहा है. ज़हूर के मुताबिक ये नई पहल युवाओं में ऊर्जा रूपांतरण का एक नया मंच बनेगी.
1976 में बने युगमंच को मोहन उप्रेती से लेकर वीरेन डंगवाल तक, जन-रचनाधर्मियों का साथ मिलता रहा है.कहा जा सकता है कि टीवी फ़िल्म और नाटक की फूहड़ता और शोर और विकरालता के इस दौर में युगमंच नैनीताल की झीलों जैसी शांति और ख़ामोशी के साथ सक्रिय है. आख़िर स्थिरता में भी कैसी अजस्र ऊर्जा और गति होती है नैनीताल के युगमंच की स्थिरता से ये भी जानना चाहिए.
-हिलवाणी डेस्क
Comments
Shukriya Shiv ji,
Yugmanch ke baare mein ek mahatvapoorna tippani karne ke liye. Mujhe lagta hai ek majedaar piece to Intakhaab par bhi jaana chaiye jo ghoshit roop se kapdon kee dukaan hai aur aghoshit roop se Yugmanch ka daftar aur Nainitaal ka coffee house jiske sabse niyamit baithakbaaz Zahoor bhai hain.
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