• विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल ने कहा राज्य में फैला है भ्रष्टाचार 
  • बहुगुणा खेमे का पलटवार, मर्यादा न लांघें स्पीकर 
  • कोका कोला के विरोध में विकासनगर का छरबा गांव आंदोलित 
  • उत्तरकाशी इको सेंसेटिव ज़ोन पर राज्य सरकार की केंद्र से गुहार 
  • मानकों में ढील की अपील, उत्तरकाशी में विरोध जारी 
  • यूकेडी में फिर टूट, काशी सिंह ऐरी ने संभाली नए गुट की कमान 
  • देहरादून की जुड़वां बहनों ने एक साथ एवरेस्ट पर चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया 
  • कुमाऊं विवि के कुलपति का इस्तीफा, शासन के दखल से खिन्न 
देस परदेस
भाषा के दर्जे की लड़ाई


एल मोहन कोटियाल

धाद के लोकभाषा सम्मेलन के कुछ ही समय बाद पौड़ी में भी एक लोकभाषा बैठक हुई जिसमें फ़ोकस पर रही गढ़वाली लोकभाषा. गढ़वाली से जुड़े लेखकों कवियों गीतकारों और अन्य विद्वानों ने गढ़वाली को आठवीं अनुसूची में शामिल होने के लिए एक दम सक्षम भाषा है ये विचार इसमें उभर कर आया.

पौड़ी के संस्कृति भवन प्रेक्षागृह में 25 और 26 जून को हुए गढ़वाली भाषा सम्मेलन हुआ. साहित्य अकादमी के सतेंद्र सिंह नूर ने कहा कि अब समय आ गया है कि जब इस पर व्यापकता के साथ शोध विश्लेषण और मूल्यांकन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि शैलियां किसी भाषा की अमीरी होती है. सब शैलियां स्वीकार की जानी चाहिए. भाषा को उप भाषा कहने की बात को उन्होने सही नहीं माना.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज ने गढ़वाली को भाषा के रूप में मान्यता मिलनी ही चाहिए. अखिल भारतीय कविता विश्वकोश के मुख्य संपादक कपिल कपूर ने कहा कि भारत में संख्या के लिहाज़ से बोले जाने वाली भाषाओं में गढ़वाली और कुमाउंनी 16वें और 17वें स्थान पर है इसलिए उन्हें भाषा का दर्जा मिलना चाहिए. सम्मेलन मे मशहूर गीतकार और गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने गढ़वाली के विकासक्रम पर प्रकाश डाला. नेगी ने कहा कि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा से विमुख हो रही है.
स्वागत भाषण में साहित्य अकादमी के सचिव अग्रहार कृष्णमूर्ति ने कहा कि अकादमी भारत में भाषाई उन्नयन के लिए 50 साल से अधिक समय से प्रयत्नशील है. अब तक उसके द्वारा 4000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी है. उन्होने कहा कि एक साथ 22 भाषाओं में प्रकाशन करने वाला दुनिया का ये अकेला संस्खान है. अकादमी उनसे इतर भी अन्य भाषाओं को सम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत है. उनके मुताबिक यदि शिव की माता की भाषा तमिल मानी जाती है तो गढ़वाल तो पार्वती का मायका है.
लोककला और परफॉ़र्मिंग आटर्स केंद्र के अध्यक्ष डी आर पुरोहित ने इस कार्यक्रम को पौड़ी में कराए जाने की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला. उन्होने भाषा के रूप में गढ़वाली के उन्नयन के लिए प्रदर्शनकारी कलाओं के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया.


देहरादून से आए भाषा विज्ञानी डॉक्टर अचलानंद जखमोला ने गढ़वाली शब्दकोश की प्रगति के बारे में जानकारी दी. उन्होंने जर्मनी के हेडलबर्ग विश्वविद्यालय में इंडोलजी विभाग के आर पी भट्ट वहां गढ़वाली में कार्य की जानकारी दी जहां वे उसकी वैज्ञानिकता पर अध्ययन कर रहे हैं.
जखमोला ने कहा कि आज हर दस दिन में दुनिया में एक भाषा मर रही है और इस प्रकार 100 साल में छह हज़ार भाषाएं दुनिया के पटल से समाप्त हो जाएंगी. भाषाई लेखक वीरेंद्र पवार ने कहा कि अपना राज्य है तो अपनी भाषा क्यों न हो. उन्होने कहा कि भाषा के रूप में इसकी जीवंतता को बनाए रखने के लिए रोजगार से भी जोड़ना ज़रूरी है.  
सम्मेलन में डॉक्टर नंदकिशोर ढौंढियाल ने गढ़वाल की समृद्ध लोक साहित्य के पर प्रकाश डाला और वर्तमान के हालात में जागर और मांगल गीतों, पवांड़ो के मूल रूप में संरक्षण की ज़रूरत बताई. 
गढ़वाली गीतकार और गायक चंद्रसिंह राही ने कहा कि जब लोक बचेगा तो विधाएं भी बचेंगी. लोकभाषा बचेगी तो परंपरा भी बचेगी. उन्होने कहा कि लोक में कुछ जुटता है और कुछ छूटता है. उन्होने लोकगीतों के संरक्षण पर भी ज़ोर दिया. राही ने कहा कि लोकगीत तभी है जब लोकधुन है. उन्होंने वादकी समुदाय को गढ़वाल का सर्वप्रथम रचनाकार बताया जिन्होने यहां पर शिल्पकला से लेकर गायन की बुनियाद रखी.
इस मौके पर उत्तराखंड भाषा संस्थान और उत्तराखंड हिंदी अकादमी की कार्यकारी अध्यक्ष और प्रभारी निदेशक सविता मोहन ने बताया कि ये संस्थाएं अभी ज़मीन पर नहीं उतरी है. उन्होंने कहा कि संस्थाएं अस्तित्व में जल्द आ जाएंगी इपर इनके ज़रिए पहला काम भाषाई सर्वेक्षण का होगा. उन्होंने कहा कि किस स्थान गांव जगह का नाम कैसे पड़ा इसका अध्ययन भी कराया जाएगा.
सविता मोहन ने कुमाउंनी और गढ़वाली पर चरित कोष बनाने की बात भी कही. उन्होंने भाषा संबंधित अलग अलग क्षेत्र के लोगों के योगदान के लिए सम्मान दिए जाने की बात भी कही.

पौड़ी से एल मोहन कोटियाल


Click to print the article.

Comments

Saket Bahuguna2010-07-13 07:43 AM
ye sammelan Garhwali bhasha ke vikaas me ek bahut hi achha kadam hai. Hamare liye yeh garv ki baat hai ki Garhwali bhasha ko Sahitya Academy ek sampoorna bhasha maan rahi hai. Ab Uttarakhand sarkar ko bhi aage aakar Garhwali bhasha ko manyata deni chahiye aur schools me ye padhai jani chahiye. Hamari bhasha hamari pehchaan hai aur is pehchaan ko bachaye rakhne k liye aise prayaas stutya hain. Jai Bharat jai Uttarakhand!
dhanesh kothari2010-07-27 02:08 AM
Lok Samaj ko bachane ke liye Bhasha ko Jinda rakhana jaroori hai, eske liye bahasen honi hi chahiye, vicharon ko dhar tabhi milegi.
mahendra choudhary2011-03-25 12:07 AM
राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए

Post Your Comments




Follow us on:


हिलवाणी से जुड़ें

हिलवाणी, उत्तराखंड और पहाड़ों को देखने, जानने और समझने का सीधा और सरल ज़रिया. हिलवाणी आपकी वेबसाइट है. हिलवाणी से आप भी जुड़ें. अगर आपके पास है कोई दिलचस्प समाचार,विचार या फ़ोटो तो हमें भेजें. ईमेल करें shiv@hillwani.com या shalinidun@gmail.com पर.

Join Us

Hillwani is an easy way to know and reach Uttarakhand and the Hills.
Hillwani is your website
Join Hillwani
If you have any news,views or photos you find interesting.
Do send us at-
shiv@hillwani.com
joshishiv9@gmail.com

हिलवाणी के लिए

आप लोग इस साईट को लगातार सुधार रहे हैं, यह एक सुखद संकेत है. इस साईट पर आकर एक सुखद अहसास होता है. साईट को और लोकप्रिय बनाने के लिए कुछ और तेजी और आक्रामकता लाइए.
- गोविंद सिंह, हल्द्वानी

HILLWANI IS BRAND E MAGAZINE OF HILLS NOW. IT IS SURPRISING THAT U R RUNNING IT SINCE A LONG TIME WITHOUT ADVERTISEMENTS. WELL DONE.
- mukesh nautiyal, dehradun

शालिनीजी, हिलवाणी वेबसाइट बहुत अच्छी लगी. काफी मेहनत से आप लोग अपडेट रखते हैं. आप और आपके साथियों को बधाई.
- हारिस शेख, मुंबई

Hillwani seems to be a great effort towards establishing a local cybersite for the uttarakhandis. Keep it up and please keep it updating.
- पीसी जोशी, नई दिल्ली

gone through the hillwani site. Enjoyed watching photos and reading reports. Doing great job.
- हर्षवंती बिष्ट, उत्तरकाशी

एक पहाड़ी इ-पत्रिका के रूप में हिलवाणी का आना अच्छा लगा
- हेमचंद्र बहुगुणा, दिल्ली

हिलवाणी पहाड़ के सरोकारों, उम्मीदों और लक्ष्यों को सार्थक तरीके से सामने लाने की एक पेशेवर कोशिश बनी रहे, ऐसी कामना है
- रामदत्त त्रिपाठी, लखनऊ

i visted hillwani recently and find it very interesting and full of knowledge not only about news and views on my Motherland Uttarakhand but also about the major issues and problems of this Himalayan state.
- गीतेश नेगी, सिंगापुर

hillwani as VIBGYOR on mountains
- भास्कर उप्रेती, देहरादून

हिलवाणी के लिये बधाई.पहाड़ के लोगों को अपनी धरती से प्यार है.मुझे इससे काफी आशाएं हैं.
- शुभ्रांशु चौधरी,छ्त्तीसगढ़