• उत्तराखंड शासन में नाटकीय बदलावः सुभाष कुमार फिर बने उत्तराखंड के मुख्य सचिव 
  • आननफानन में सौंपा कार्यभार, निवर्तमान मुख्य सचिव जैन थे अनुपस्थित 
  • कोका कोला प्लांट को लेकर विकासरनगर के छरबा गांव में विरोध शुरू 
  • गंगोत्री से उत्तरकाशी तक 100 किलोमीटर क्षेत्र इको सेंसेटिव ज़ोन घोषित 
  • उत्तरकाशी में विरोध, राज्य सरकार दुविधा में, केंद्र से अपील का फ़ैसला 
  • निकाय चुनाव में कांग्रेस की करारी हार, निर्दलीयों का दबदबा, बीजेपी को कुछ लाभ 
  • बिनसर अभयारण्य के 10 किमी दायरे में रिहाइश की पाबंदी, स्थानीय लोग भड़के 
  • वेब पत्रकारिता पर राजकमल प्रकाशन से किताब, वेब पत्रकारिताः नया मीडिया नये रुझान 
आधी दुनिया
इरोम शर्मिलाः मौत मेरे लिए सज़ा नहीं

पिछले दिनों भ्रष्ट्राचार के ख़िलाफ़ अन्ना हज़ारे की भूख हड़ताल ने राजनीतिक और सामाजिक हलक़ो में तूफ़ान खड़ा कर दिया था और उस भूख हड़ताल को ख़त्म करने के लिए होड़ सी लग गई. उसी उथल पुथल में मणिपुर की इरोम शर्मिला की पिछले 11 साल से भूख हड़ताल पर भारत सरकार की उदासीनता पर कई सवाल उठे.

इरोम शर्मिला ग्यारह सालों से इम्फाल के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में आत्महत्या के आरोप में बंदी है. वे 1958 में पारित सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून को हटाए जाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं. उनसे मिलना काफ़ी मुश्किल है. तीन महीनों तक लगातार कोशिश करने के बावजूद मुलाक़ात नहीं हो पाई. उन तक बीबीसी ने अपने सवाल ज़रूर पहुंचाए और उन्होंने हाथ से लिखकर अपना जवाब भेजा. सवाल जवाब का मुख्य अंश यहां प्रस्तुत है:

आप पिछले 10 सालों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं. इतना लंबा अरसा बीत गया है क्या आपको लगता है कि कभी आपकी मांग पूरी होगी?

मुझे सच पर विश्वास है. सच की ही अंत में जीत होती है. और इस तक पंहुचने के लिए मैं अवधि पर ध्यान नहीं देती हूँ.

आपको लगता है कि आपके विरोध का तरीका सही है ?

जी हाँ, बिल्कुल. मैं अपने तरीके से बिल्कुल संतुष्ट हूँ और इसे सही मानती हूँ. अहिंसावादी तरीके का कोई विकल्प नहीं है क्योंकि इससे किसी और को नुकसान नहीं हुआ है. मैं इस कठोर क़ानून के ख़िलाफ अपनी लड़ाई लड़ रही हूँ जिसे एक बेहद कायर सरकार ने लागू किया है.
 
क्या आपको नहीं लगता कि भारत सरकार को पृथकतावादी आंदोलन से मुक़ाबला करने के लिए एक मज़बूत क़ानून की ज़रूरत है?
 
किसी भी देश में पृथकतावादी आंदोलन इसीलिए पनपते हैं क्योंकि वहाँ अच्छे शासन की कमी होती है. ये उस प्रशासन की पूरी तरह से विफलता समझी जानी चाहिए. पृथकतावादी आंदोलनों से मुक़ाबला करने के लिए केवल तानाशाहों को ऐसे कठोर क़ानूनो की ज़रूरत होती है. जो विद्रोही गुट हैं वो भी इसी देश का हिस्सा हैं. उनकी बात को समझने की ज़रूरत है. मेरा विश्वास है कि प्यार और बातचीत से हर रास्ता निकल सकता है.
 
आप कब तक भूख हड़ताल पर रहेंगी?
 
मैं कुछ नहीं कह सकती लेकिन इतना कह सकती हूँ कि जब तक मेरी मांग पूरी नहीं हो जाती मैं भूख हड़ताल पर ही रहूंगी. पिछले दस सालों में मैने अपने मुंह में एक दाना या एक बूंद पानी नहीं गया है. हाँ जबरदस्ती मुझे नाक के ज़रिए जरूर फीड करते हैं. मैं दांत भी रूई के फाए से रगड़ कर साफ़ करती हूं कि मेरा प्रण न टूटे. मैंने दस सालों से अपनी मां से भी मुलाक़ात नहीं की है क्योंकि मैं अपने लक्ष्य को पाकर ही उनका मुंह देखूंगी.

आपको मौत से डर नहीं लगता ?

मेरे लिए मौत सज़ा नहीं है.

क्या आपको ग़ुस्सा आता है कि अभी तक सरकार ने आपकी बात नहीं मानी है ?

अपनी लड़ाई की शुरुआत से ही मै सरकार के नकारात्मक रवैए से परिचित हूँ. मैंने कई बार अपने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात की है. हर बार मेरे हर सवाल पर वे यही कहते रहे हैं कि केंद्र ने मना कर दिया है. ये सिर्फ़ इस बात को दर्शाता है कि वे एक लोकतांत्रिक नेता के रूप में अपने मासूम लोगों की फ़िक्र नहीं करते हैं. उनकी पूरी चिंता केवल अपनी कुर्सी को बचाने की होती है.

बीबीसी हिंदी की संवाददाता रूपा झा की ये प्रस्तुति http://www.bbc.co.uk/hindi/ से साभार.

Click to print the article.

Comments


Post Your Comments




Follow us on:


हिलवाणी से जुड़ें

हिलवाणी, उत्तराखंड और पहाड़ों को देखने, जानने और समझने का सीधा और सरल ज़रिया. हिलवाणी आपकी वेबसाइट है. हिलवाणी से आप भी जुड़ें. अगर आपके पास है कोई दिलचस्प समाचार,विचार या फ़ोटो तो हमें भेजें. ईमेल करें shiv@hillwani.com या shalinidun@gmail.com पर.

Join Us

Hillwani is an easy way to know and reach Uttarakhand and the Hills.
Hillwani is your website
Join Hillwani
If you have any news,views or photos you find interesting.
Do send us at-
shiv@hillwani.com
joshishiv9@gmail.com

हिलवाणी के लिए

आप लोग इस साईट को लगातार सुधार रहे हैं, यह एक सुखद संकेत है. इस साईट पर आकर एक सुखद अहसास होता है. साईट को और लोकप्रिय बनाने के लिए कुछ और तेजी और आक्रामकता लाइए.
- गोविंद सिंह, हल्द्वानी

HILLWANI IS BRAND E MAGAZINE OF HILLS NOW. IT IS SURPRISING THAT U R RUNNING IT SINCE A LONG TIME WITHOUT ADVERTISEMENTS. WELL DONE.
- mukesh nautiyal, dehradun

शालिनीजी, हिलवाणी वेबसाइट बहुत अच्छी लगी. काफी मेहनत से आप लोग अपडेट रखते हैं. आप और आपके साथियों को बधाई.
- हारिस शेख, मुंबई

Hillwani seems to be a great effort towards establishing a local cybersite for the uttarakhandis. Keep it up and please keep it updating.
- पीसी जोशी, नई दिल्ली

gone through the hillwani site. Enjoyed watching photos and reading reports. Doing great job.
- हर्षवंती बिष्ट, उत्तरकाशी

एक पहाड़ी इ-पत्रिका के रूप में हिलवाणी का आना अच्छा लगा
- हेमचंद्र बहुगुणा, दिल्ली

हिलवाणी पहाड़ के सरोकारों, उम्मीदों और लक्ष्यों को सार्थक तरीके से सामने लाने की एक पेशेवर कोशिश बनी रहे, ऐसी कामना है
- रामदत्त त्रिपाठी, लखनऊ

i visted hillwani recently and find it very interesting and full of knowledge not only about news and views on my Motherland Uttarakhand but also about the major issues and problems of this Himalayan state.
- गीतेश नेगी, सिंगापुर

hillwani as VIBGYOR on mountains
- भास्कर उप्रेती, देहरादून

हिलवाणी के लिये बधाई.पहाड़ के लोगों को अपनी धरती से प्यार है.मुझे इससे काफी आशाएं हैं.
- शुभ्रांशु चौधरी,छ्त्तीसगढ़